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साउथ के भगवान सुपरस्टार रजनीकांत ने फर्श से अर्श तक आने की कहावत को सत्य साबित करके बताया !

दुनिया में ऐसे बहुत ही कम लोग होते हैं जिनकी जीवनी इतनी प्रेरणादायी होती हैं कि लोग उनकी मिसाल देते हैं….आम लोगों के लिए उम्मीद का प्रतीक हैं रजनीकांत….
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इसी वजह से ये कहना कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी कि रजनीकांत ऐसे इंसान हें जिन्होंने फर्श से अर्श तक आने की कहावत को सत्य साबित करके बताया हैं…..दरअसल दुनिया में ऐसे कई लोग हैं  जिन्होनें कई सफलताएं हासिल की हैं लेकिन जिस तरह से रजनीकांत ने अभावों और संघर्षों में इतिहास रचा है वैसा बहुत ही कम लोग कर पाते हैं…..
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संघर्षपूर्ण बचपन
12 दिसम्बर 1950 को कर्नाटक के बैंगलोर में एक बेहद मध्यमवर्गीय मराठी परिवार में रजनीकांत का जन्म हुआ…उनके बचपन का नाम शिवाजी राव गायकवाड़ है…..उनके पिता रामोजी राव गायकवाड़  बैंगलोर के पुलिस कांस्टेबल  और माता जीजाबाई गृहिणी थी…
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1956 में उनके पिता के रिटायर हो जाने के बाद उनका परिवार बैंगलोर के हनुमंत नगर में चला गया और वही एक घर भी बनवाया….वे बचपन में घर पर मराठी और बाहर कन्नड़ में बात करते थे….
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छोटी उम्र में ही मां की  मौत के बाद चार भाई-बहनों में सबसे छोटे रजनीकांत को अहसास हुआ कि घर की माली हालत ठीक नहीं है….जिस वजह से उन्होंने परिवार को सहारा देने के लिए कुली के तौर पर अपने काम की शुरुआत की और फिर वे ब.टी.एस में बस कंडक्टर की नौकरी करने लगे….
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स्टाइल ऑफ ऑइकन
कंडक्टर के तौर पर भी रजनीकांत का स्टाइल  किसी सुपरस्टार से कम नही था…
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रजनी अपनी अलग तरह से टिकट काटने और सीटी मारने की शैली को लेकर यात्रियों और दुसरे बस कंडक्टरों के बीच इतने पॉपलुर थे कि बस स्टैंड पर सभी मुसाफिर उनके इसी  स्टाइल को देखने के लिए घंटो तक लंबी भीड़ लगाए खड़े रहते थे….
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सपने हुए हकीकत में तब्दील
रजनीकांत को  फिल्मों में एक्टिंग करने का शौक तो हमेशा से ही था और वही शौक धीरे धीरे जुनून में तब्दील होता चला गया….अपने इस सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने अपना काम छोड़ कर चेन्नई के अद्यार फिल्म इंस्टिट्यूट में दाखिला ले लिया…
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वहीं इंस्टिट्यूट में एक नाटक के दौरान उस समय के मशहूर फिल्म निर्देशक के. बालाचंदर की नज़र रजनीकांत पर पड़ी और वो रजनीकांत से इतना प्रभावित हुए कि उन्होनें वहीँ उन्हें अपनी फिल्म अपूर्व रागांगल में एक चरित्र निभाने का ऑफर दे डाला….हालांकि इस फिल्म में रजनी का किरदार काफी छोटा था जिससे उन्हें कोई खास पहचान ना मिल पाई….लेकिन उनकी एक्टिंग की तारीफ़ हर उस इंसान ने की जिसकी नज़र उन पर पड़ी….
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आगे पढ़े – अपने फिल्मी सफर में रजनीकांत को किस फिल्म से पहचान मिली



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