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मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियों से छुटकारा पाने के लिए यहां के लोग खाते हैं ‘चापड़ा’ यानी ‘लाल चींटी की चटनी’

भारत अलग-अलग विविधताओं का देश हैं  यहां जितने प्रकार के लोग हैं ….उतने ही प्रकार के हैं उनके भोजन …… उनके भोजन में ऐसे कुछ खास व्यंजन पाए जाते हैं जिसकी दूसरे कल्पना भी नही कर सकते…
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ऐसा ही एक व्यंजन हैं ‘चापड़ा’ यानी कि लाल चींटी की चटनी जो ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड राज्यों के घने जंगलों वाले आदिवासी इलाकों में खाई जाती है…
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जंगलों में आदिवासी आम, अमरूद, साल और अन्य ऐसे पेड़ से चींटियों को जमा करके उन्हें  पीस देते है औऱ फिर उसमें स्वादानुसार नमक, मिर्च मिलाकर उसे रोटी या फिर ऐसे ही खा लेते हैं….
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चींटी में फॉर्मिक एसिड होने के वजह से इसकी चटनी काफी चटपटी होती हैं….इसी के साथ-साथ ये प्रोटीन का भी अच्छा स्रोत हैं…
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आदिवासियों का मानना है कि इससे मलेरिया तथा डेंगू जैसी बीमारियां भी ठीक होती हैं और तो और प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है….
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सिर्फ इतना ही नही ये भी मान्यता हैं कि  साधारण बुखार होने पर ग्रामीण पेड़ के नीचे बैठकर चीटों से स्वयं को कटवाते हैं, जिससे बुखार उतर जाता हैं….
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