article67_7

अपने ही पन्नों में अपनी ‘दास्तां’ – ‘बालकनामा’

दिल्ली क गौतम नगर में  फुटपाथ पर रहने वाले कुछ बच्चे अपना खुद का अखबार चलाते है….
article67_1
Source


इस अखबार का नाम ‘बालकनामा’ है….
article67_2
Source

बालकनामा अखबार पूरी तरह से बच्चों के लिए ही है…. इसकी शुरुआत सन 2003 में हुई थी…
article67_3
Source

इस छोटी सी उम्र में इन बच्चों का जज्बा देखने लायक हैं…  कुछ बच्चों का ग्रुप रिपोर्टिंग के लिए साउथ दिल्ली, और कुछ ग्रुप नॉर्थ दिल्ली जाता है…
article67_4
Source

महीने भर की कडी मेहनत के बाद अखबार की 8000 प्रतियां छापी जाती हैं…. इन 8000 प्रतियों को दिल्ली के कई अलग-अलग इलाकों में बांटा जाता हैं….
article67_5
Source

बालकनामा में जिस भी रिपोर्टर की ऊम्र 18 साल से ज्यादा होती है… उसे आखबार का सलाहकार बना दिया जाता है…
article67_6
Source

बच्चे दिन रात मेहनत कर अपने अखबार में बच्चों पर हो रहे जुर्म को छापते है…. इस अखबार को छापने के लिए ‘चेतना’ नाम का एनजीओ इनकी मदद करता है…
article67_7
Source

बालकनामा का नेटवर्क आज देश के चार राज्यों मध्य प्रदेश, बिहार, यूपी और हरियाणा में फैला हुआ है….
article67_8
Source

इस समय बालकनामा से 10,000 बच्चे जुड़े हुए हैं….इस अखबार की कीमत मात्र 2 रुपये हैं…तो दोस्तों  आप भी रोजाना ना सही पर कभी कभी इन मासूमों की दास्तां को पढ़ ले…
article67_9
Source



Loading...
loading...