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ना लेना हमसे पंगा उस्ताद हम बड़े है

हर कोई छात्र यह प्लान बनाता है कि वह कॉलेज के पहले दिन ऐसा क्या करें या क्या पहनें की सबके दिलों-दिमाग में वह अपनी एक अलग पहचान बना पाएं… कॉलेज के पहला दिन हर किसी के लिए उत्साह से भरा होता लेकिन कहीं ना कहीं छात्रों के मन में रैगिंग को लेकर एक डर बैठा होता है…
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दरअसल रैगिंग सीनिर्यस और जूनियर्स के बीच संवाद कायम करने का बेहतर विकल्प माना जाता है लेकिन कुछ समय से रैगिंग के नाम पर सीनिर्यस जूनियर्स का मानसिक और शारीरिक रुप से उत्पीड़न करने लगे है…इसका परिणाम यह होता है कि युवा अपनी आने वाले कल का खुद ही अपने हाथों गला घोंट लेता है यानि कि खुदखुशी कर लेता है…
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लेकिन अब अगर आपको लगता है कि रैगिंग के नाम पर आपके साथ उत्पीड़न हो रहा है तो घबराने की बजाय आपको यह चंद कदम उठा कर अपने भविष्य को खुशहाल बनाना चाहिए…
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अगर कोई सीनिर्यस आपके साथ मारपीट या बदतमीजी करता है तो उससे उलझने की बजाय कॉलेज के शिक्षकों या प्रशासिनक अधिकारियों को घटना की जानकारी दें…
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खुद को कहीं से भी डरा हुआ महसूस ना होने दें तथा कॉलेज में किसी करीबी व्यक्ति से संपर्क साधे रखे..जो कॉलेज के माहौल में ढ़लने में आपकी मदद करेगा…

किसी शहर, धर्म या जाति को लेकर व्यंग ना करें जिससे किसी की भावना को ठेस पहुंचें… इसी के साथ साथ रैगिंग जैसे गंभीर मुद्दे पर खुद को मानिसक रुप से तैयार करें…
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