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करलो करलो चारों धाम मिलेगें कृष्ण मिलेगें राम

चार धाम यात्रा का हिन्दुओं के बीच बहुत महत्व है…इस यात्रा की तुलना मुस्लिमों की हज यात्रा से की जाती है…हिन्दू समुदाय में यह मान्यता है कि जीवन में एक बार चार धाम की यात्रा अवश्य करनी चाहिए…जिससे मनुष्य के सारे पाप धुल जाते है..और मनुष्य निष्पाप हो मोक्ष प्राप्त करता है…देश की एकता और अखण्डता तथा हिन्दु धर्म की पुर्नस्थापना करने के लिए शंकराचार्य ने चार दिशाओं में चार धाम स्थापित किए….यानि बद्रीनाथ उत्तर में, जगन्नाथ पुरी पूर्व में, रामेश्र्वरम दक्षिण में और द्वारका पश्र्चिम में … माना जाता है कि भगवान विष्णु जब चारों धामों पर बसे अपने धामों की यात्रा पर जाते है तो हिमालय की ऊंची चोटियों पर बने बद्रीनाथ में स्नान करते है…पश्र्चिम में गुजरात के द्वारिका में वस्त्र पहनते हैं..पुरी में भोजन करते है और दक्षिण में रामेश्वरम में विश्राम करते है…
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1) बद्रीनाथ– बद्रीनाथ मंदिर जिसे बदरीनारायण मंदिर भी कहते है यह नर नारायण की गोद में बसा बद्रीनाथ नीलकण्ठ पर्वत का पार्श्र्व भाग है…यह मंदिर अलकनंदा नदी के किनारे उत्तराखंड के राज्य में स्थित है…. बद्रीनाथ मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है…माना जाता है कि उन्होनें इस पवित्र स्थान पर तपस्या की थी….इस तीर्थस्थल के दर्शन करने का सबसे अच्छा समय मानसून छोड़कर मई से अक्टूबर तक का है…..
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2) जगन्नाथ पुरी – द्वापर के बाद भगवान कृष्ण पुरी में निवास करने लगे और बन गए जग के नाथ अर्थात जगन्नाथ…. जगन्नाथ मंदिर ओड़िशा के पुरी में स्थित है… इसे सात पवित्र पुरियों में शामिल किया गया हैं…यह मंदिर विष्णु के 8वें अवतार श्रीकृष्ण को समर्पित है… यहां भगवान जगन्नाथ बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ विराजते है… इस तीर्थस्थल के दर्शन करने का सबसे अच्छा समय अप्रैल से अक्टूबर तक का हैं..
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