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बचपन में इन खेलों में कोई फिस्सडी तो कोई हीरो!

अक्कड़-बक्कड़ बम्बे बो,अस्सी नब्बे पूरे सौ…सौ में लागा धागा, चोर निकल के भागा…पौसम्म पा भाई पौसम्म पा…. यह लाइनें दिलचस्प होने के साथ-साथ बचपन के खेल भी बहुत ही दिलचस्प होते थे… इन खेलों में वो मजा था जो शायद आज के बड़े-बड़े मैदानों में क्रिकेट, टेनिस, बास्केटबॉल या फिर मोबाइल पर विडीयो गेम खेल कर भी ना मिल पाएं….आज भी वक्त चाहें कितना ही बदल गया हो पर बच्चा हो या बूढ़ा हर कोई यह खेल खेलना पसंद करेगा….

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1) पिट्ठू – यह वो खेल है जिसमें मार्बल के 8-10 टुकड़ों को एक के उपर एक करके रख ढ़ेरी बना दी जाती….फिर दो टीमों को बॉल से उस ढेरी को तोड़ना होता और ढ़ेरी पर निशाना लगाने के बाद जो टीम बॉल को पहले पकड़ने भागती तो वहीं दूसरी टीम बॉल पकड़ में आने से पहले ढ़ेरी को जल्दी से तैयार करती…

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2) लंगड़ी टाँग – एक टांग पर कूदते हुए दूसरी टीम के लोगों को आउट करना होता था..यह खेल सुनने में जितना सरल लगता है खेलने में उतना ही मुश्किल था

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3) कंचे- बचपन में कंचों को जमा करने का एक अलग ही जनून था.. बचपन में अक्सर निक्कर की जेबों का फटना तय था…जब ढ़ेर सारे कंचे खेल में जीते जाते थे…

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4) टिपि टिपि टैप – इस खेल में रंगों का ज्ञान बेहद तरीके से मिल जाता है… इस खेल में जिसकी टर्न होती वो एक रंग बोलता और बाकि सभी को उसी रंग की किसी भी वस्तु पर पर अपनी ऊंगली रखनी पड़ती…

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5) राजा-वजीर-चोर-सिपाही – यह बचपन को वो खेल है जिसे बच्चे छुप-छुप कर क्लास में खेलते थे….

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6) चुटपुटिया- खिलौने वाली पिस्तौल की गोलियां जिन्हें हम जमीन से रगड़ कर ही फोड़ देते थे..

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7) चिड़िया उड़ – इस खेल में हम ना सिर्फ पक्षियों बल्कि ना जाने किसे किसे उड़ा देते थे…

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8) जीरो काटा- यह वो खेल था जो अकसर क्लास में टीचर की डाँट खिलवाता था….

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9) नेम-प्लेस-एनिमल-थिंग- यह खेल ना सिर्फ खेलने में मजा आता था बल्कि उसी के साथ-साथ इस खेल में नॉलेज भी अच्छी हो जाती थी…

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हो ना हो पर आज के बच्चों में धमाचौकड़ी औँर तरह तरह की छोटी तकरारें देखने को आखिर कहां मिलती है…



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